खून के आंसू

उसी चौराहे पर
जहाँ पर मुस्कराती बुद्ध की  प्रतिमा लगी थी –
आज उसके ठीक नीचे दिन दहाड़े
 ंंचाकुओं से गोद कर 
 एक  जिंदा  आदमी को लाश में तब्दील कर डाला गया ।
 लाश से  बहतेे लहू के  लाल फव्वारे
छिटक कर बह रहे  थे मूर्ति के उस भाग से
जहां आंखें बनी थीं ।
 बुद्ध के अनुयायियों ने बुद्ध को
खून के आंसू रुला कर
ऐतिहासिक फर्ज पूरा कर लिया ।

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डॉ. दिनेश चंद्र थपलियाल

I like to write on cultural, social and literary issues.
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